Achinhit Kisse

byAbhay Vasant Marathe

Swatantrata Ki Neev Se (Part 1)

Forgotten Indian revolutionaries erased from post-independence history are named and honoured in these charged, documented accounts.

Overview

India's freedom was not won by one movement or one political family — yet the decades after 1947 saw a systematic effort to erase from schools, public spaces, and collective memory the revolutionaries who suffered torture, faced the gallows, and were bound to cannon mouths. Abhay Vasant Marathe, author of the acclaimed O Utho Krantikariyo, argues that these martyrs were killed twice: first by the British and their collaborators, then by the deliberate silence of post-independence governments.

This first volume of Achinhit Kisse gathers stories of those forgotten fighters with the aim of restoring names and acts to living memory. Marathe's prose is direct and charged — readers report hair standing on end and fists clenching — and his charge is specific: political parties that colluded with colonial power later claimed credit for liberation while burying those who actually bled for it.

For anyone who wants to understand the fuller, contested history of India's independence struggle — beyond the official narrative — this book insists that the debt to those unremembered martyrs has not yet been paid.

ओ उठो क्रांतिकारियो...जैसी कालजयी और महत्वपूर्ण पुस्तक लिखने वाले श्री अभय मराठे का लेखन महान भारतवर्ष के उन क्रांतिकारियों को सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने इस राष्ट्र के स्वाभिमान के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। भारत की स्वतंत्रता के लिए अलग-अलग कालखंड में, अलग-अलग तरह के युद्ध लड़ने वाले क्रांतिकारियों ने जो त्याग किया, उसी का सुपरिणाम है कि आज भारतवर्ष इस संसार के सबसे आनंद से भरे देशों में से एक है। किंतु एक सत्य यह है कि उन बलिदानी क्रांतिकारियों को स्वतंत्रता के बाद षड्यंत्रपूर्वक भुलाने का प्रयास किया गया। वर्ष 1947 में भारत ने लड़कर जो स्वतंत्रता अर्जित की, उस स्वतंत्रता में अपने रक्त, मज्जा, प्राण की आहुति देने वाले बलिदानियों को जानबूझकर भुला दिया गया। आजादी के बाद की सरकारों ने पाठ्यक्रमों से, सार्वजनिक महत्व के स्थलों से और लोगों के दिलों से भी उन बलिदानियों की स्मृतियों को मिटाने का काम किया। इस षड्यंत्र के कारण उन महान बलिदानियों को मानो दो बार मरना पड़ा, पहली बार तो वे अंग्रेजों या देशविरोधी लोगों के कारण वीरगति को प्राप्त हुए और दूसरी बार देश द्वारा भुला दिए जाने के कारण मानो फिर से मृत्यु को प्राप्त हुए। राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक षड्यंत्र इतना गहरा था कि भारत को आजादी दिलाने का सारा श्रेय केवल और केवल उस खेमे को दे दिया गया, जिस खेमे के लोगों ने अंग्रेजों से दुरभिसंधियां की थीं और जेलों में भी मौज उड़ाई थी। इसके उलट जेलों में यातना सहने वाले, फांसी पर चढ़ जाने वाले और तोपों के मुंह पर बांधकर मृत्युदंड पाने वाले क्रांतिकारियों का उल्लेख तक नहीं हुआ। जबकि वे लड़े थे और उनकी लड़ाई के कारण ही भारत से अंग्रेजों के पांव उखड़े थे। बहरहाल, इन्हीं अचीन्हे क्रांतिकारियों को अब जन-जन तक पहुंचाने का भगीरथी प्रयास श्री अभय मराठे कर रहे हैं। पहले उन्होंने पुस्तक ओ उठो क्रांतिवीरो लिखकर श्रद्धांजलि-यज्ञ प्रज्वलित किया और अब उसमें अचीन्हे क्रांतिकारियों के किस्सों की मंगल-आहुति दे रहे हैं। यह उस षड्यंत्र के विरुद्ध एक साहसिक आवाज है, जो षड्यंत्र स्वतंत्रता के बाद से कई दशकों तक देश की सत्ता में रहने वाले राजनीतिक दल और उसके नीति-निर्धारकों ने क्रांतिकारियों के साथ किया था। श्री अभय मराठे की यह पुस्तक वैचारिक अंधकार में क्रांतिकारियों के गौरव की एक प्रज्वलित मशाल है, जो आने वाली पीढ़ियों के मन से कुहासा और अंधेरा खत्म करेगी और उन्हें हमारे क्रांतिकारियों की गर्व व बलिदान से भरी कहानियां सुनाएगी।

Author

Abhay Vasant Marathe photo
Abhay Vasant Marathe

लेखक बाल्य काल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नियमित शाखाओं में जाने के कारण उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के बारे में जानने की जिज्ञासा निर्माण हुई।लेखक ने अपनी इस क्षुधा को विभिन्न लेखकों द्वारा लिखी गई पुस्तकें पढ़कर शांत करने का प्रयास किया l इस प्रकार लेखक का विगत दो दशकों से अध्ययन कार्य जारी रहा। इस दौरान लेखक श्री अभय वसंत मराठे द्वारा लिखित दो पुस्तकें प्रकाशित हुई। "ओ!उठो क्रांतिवीरों" जिसमें लगभग ८०० से अधिक ज्ञात और अज्ञात क्रांतिकारियों के बारे में लिखा गया है। लेखक की दूसरी पुस्तक "अमर क्रांतिवीर उमाजी राजे" का प्रकाशन २०२२ में किया गया।इस अज्ञात क्रांतिकारी को पुस्तक के रूप में लाने का आग्रह प्रसिद्ध इतिहासकार स्व .बाबा साहेब पुरंदरे ने लेखक को किया था। पुस्तकों की रचनाओं के साथ लेखक श्री अभय वसंत मराठे के अनेक लेख पत्र -पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुए है।जिसका विषय प्रमुखता से भारतीय स्वतंत्रता के संग्राम का इतिहास तथा स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों का रहा है। दैनिक पत्र नईदुनिया (जागरण) के "किस्सा कुछ यू था" कालम में लेखक द्वारा लिखित १५० से अधिक ऐतिहासिक तथा अनछुएं किस्से प्रकाशित हुए l इसके साथ ही लेखक ने विभिन्न विद्यालय, महाविद्यालयों तथा सामाजिक संस्थाओं में व्याख्यान सत्रों में मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता कर ज्ञात तथा अज्ञात क्रांतिकारी तथा ऐतिहासिक घटनाओं को लोगों के समक्ष रखा l इसमें कुछ ऑनलाइन भी व्याख्यान हुए थे। लेखक का प्रमुख उद्देश्य यह है कि लोगों को खासकर नवीन पीढ़ी के बच्चों को भारतीय स्वतंत्रता के महान इतिहास के बारे जानकारी प्राप्त हो और उसे पढ़कर ,जानकर वे राष्ट्रवाद , राष्ट्रसेवा में अपना योगदान दे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कई अनछुए पहलू व क्रांतिकारियों के कुछ अनसुने किस्सों को पर्याप्त स्थान प्राप्त नहीं हो सका इसलिए लेखक का यह महत्त्वपूर्ण प्रयास रहा हैं कि ऐसे "अचिह्नित" किस्से जनमानस के समक्ष आ जाए।

View Author Profile
WA