Rama Vs Ram

byDr. Neelam Mahendra

valmiki ramayan ke rahasyon se parda uthaatee ek utkrsht rachna

Dr. Neelam Mahendra uses Valmiki's Ramayan to fact-check popular myths about Ram — from Sita's abandonment to Shambuk Vadh.

Overview

Valmiki's Ramayan and the Ram that most Indians carry in their heads are not always the same figure. Over centuries, popular retellings added details, softened episodes, and created versions that now circulate as fact — the Lakshman Rekha, Shambuk Vadh, Valmiki as a reformed dacoit, Shabari's half-eaten fruit. Dr. Neelam Mahendra goes back to the Sanskrit source to ask which of these are there and which are not.

The book examines a series of specific episodes that generate the most pointed questions about Ram's character and conduct: the abandonment of Sita, the killing of Shambuk, meat-eating references in the text, and several other passages that critics have used to argue against Ram as a moral exemplar. Drawing entirely on Valmiki's own words and the internal logic of the text, Mahendra offers fact-grounded responses to each of these objections — not to win a theological argument, but to restore the figure that actually appears on the page.

For readers who want to engage seriously with the Ramayan rather than inherit someone else's version of it, this book is a necessary reference.

ABOUT THE BOOK: इस पुस्तक को लिखने का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि जी द्वारा जो प्रभु श्रीराम का चित्रण किया गया है उसका विशुद्ध और प्रमाणिक स्वरूप प्रस्तुत करना है। प्रभु श्रीराम को लेकर जो मिथक अवधारणाएं आम जन के मन में हैं, उन्हें दूर करने का प्रयत्न लेखिका के द्वारा किया गया है। श्रीराम द्वारा सीता का परित्याग हो या लक्ष्मण रेखा हो, शम्बूक वध हो या रामायण में मांसाहार का वर्णन हो, महर्षि वाल्मीकि जी के मुनि बनने से पूर्व उनके एक डाकू होने की बात हो या शबरी द्वारा श्रीराम को झूठे फल खिलाने की बात हो। इस प्रकार के अनेक विषयों से सम्बंधित शंकाओं को दूर करने का एक गिलहरी प्रयास है यह पुस्तक। विशेष : यह पुस्तक वाल्मीकि रामायण के आधार पर तथ्यों और तर्कों से विभिन्न शंकाओं का समाधान तो कर सकती है किंतु कुतर्कों के समाधान के लिए लेखिका क्षमाप्रार्थी है। इस आशा के साथ कि यह पुस्तक अपने पाठकों की उम्मीद पर खरी उतरेगी, आप सभी सुधि पाठकों को समर्पित.. ...

Author

Dr. Neelam Mahendra photo
Dr. Neelam Mahendra

ABOUT THE AUTHOR : डॉ नीलम महेंद्र देश विदेश के विभिन्न समाचार पत्रों के लिए स्वतंत्र रूप से कई वर्षों से सतत स्तम्भ लेखन करती रही हैं। अपने विचारोत्तेजक लेखों के माध्यम से गम्भीर से गम्भीर विषय को बेहद सरलता से प्रस्तुत करने के कारण ये अपने पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रही हैं। लेखन के साथ साथ वे एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर एवं स्पिरिचुअल मोटिवेटर भी हैं। अनेकों वेबसाइट, मैगज़ीन, एवं समाचार पत्रों के लिए लिखने के साथ साथ अपने स्वतंत्र ब्लॉग के लिए भी ये लिखती हैं। इनके आलेख दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, पंजाब केसरी, सामना, राष्ट्रीय सहारा, पत्रिका जैसे राष्ट्रीय अखबारों से लेकर से लेकर यूएसए, कनाडा तथा नेपाल के अखबारों में हिंदी अंग्रेजी उर्दू एवं पंजाबी में प्रकाशित होते रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे "राष्ट्रवाद एक विवाद" एवं "स्त्री होने का उत्सव मनाएं", इन पुस्तकों का लेखन भी कर चुकी हैं। अपने लेखन कार्य के लिए एक तरफ इन्हें अपने पाठकों का भरपूर स्नेह मिला तो दूसरी तरफ इन्हें समय समय पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया। मध्यभारत हिंदी साहित्य सभा द्वारा साहित्य सम्मान, नारी शक्ति सम्मान, अटलबिहारी पत्रकारिता सम्मान, मामा मानिकचन्द सर्वश्रेष्ठ स्तम्भलेखक सम्मान जैसे अनेकों पुरस्कार इन्हें प्रदान किए गए हैं। लेकिन अपने पाठकों से मिले प्रेम को वो अपना सबसे बड़ा सम्मान मानती हैं।

View Author Profile
WA