Bachpan Ki Kahaniyan
Thirteen Hindi stories in which children's sharp perception quietly outmanoeuvres the adult world around them.
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श्री चक्रपाणी कन्नन का जन्म दक्षिण भारत के विरुदुनगर शहर में हुआ। जन्म के बाद से उनके जीवन का अधिकांश भाग जमशेदपुर शहर, झारखण्ड (तत्कालीन बिहार राज्य) में बीता। इनके पिता टाटा कंपनी में कार्यरत थे अतः इनका सारा परिवार इसी शहर में रहने लगा। उन्होंने जमशेदपुर के XLRI से बिज़नस मैनेजमेंट (PGDBM), रांची विश्वविद्यालय से B.Com और Tata Institute से डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग किया है। इन्होंने अपनी नौकरी की शुरुआत टाटा कंपनी से की। इसके बाद सऊदी अरब, चेन्नई और दुबई में अलग-अलग कम्पनियों में कार्यरत रहे। नौकरी से अवकाश प्राप्त करने के बाद अब अपने बच्चों के साथ रह रहे हैं।बचपन से ही दोस्तों और सहकर्मियों के साथ छोटी घटनाओं को रोचक तरीके से कहना, ड्रामों में हिस्सा लेना, अपने बच्चों को रोज एक नई कहानी सुनाना इत्यादि इनके शौक का हिस्सा थीं। आज की तनाव पूर्ण जीवन शैली में तत्कालीन हास्यास्पद किस्सों की बातें आपको भी गुदगुदा जाएंगी। भाषा शैली के साथ साथ इनकी कहानियों में आपको तत्कालीन संस्कारों और खान पान की भी झलक मिलेगी, जिनके समावेश से इनकी कहानियां प्रेरणादायक होने के साथ साथ चटपटी भी बन पड़ी हैं। कहानियों के इस संकलन के माध्यम से इन्होंने पाठकों के लिए मनोरंजक और ज्ञानवर्धक साहित्य सृजन किया है। ये "सौमित्री उपनाम से कहानियां लिखते हैं। इन कहानियों में इन्होंने अपने दोस्तों के साथ बिताए गए बचपन के कुछ यादगार पलों को काल्पनिकता का प्रयोग करते हुए कहानियों का रूप दिया है। कहानियों में कुछ त्रुटियां हो सकती हैं जिनके लिए लेखक क्षमा प्रार्थी है।
श्री चक्रपाणी कन्नन का जन्म दक्षिण भारत के विरुदुनगर शहर में हुआ। जन्म के बाद से उनके जीवन का अधिकांश भाग जमशेदपुर शहर, झारखण्ड (तत्कालीन बिहार राज्य) में बीता। इनके पिता टाटा कंपनी में कार्यरत थे अतः इनका सारा परिवार इसी शहर में रहने लगा। उन्होंने जमशेदपुर के XLRI से बिज़नस मैनेजमेंट (PGDBM), रांची विश्वविद्यालय से B.Com और Tata Institute से डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग किया है। इन्होंने अपनी नौकरी की शुरुआत टाटा कंपनी से की। इसके बाद सऊदी अरब, चेन्नई और दुबई में अलग-अलग कम्पनियों में कार्यरत रहे। नौकरी से अवकाश प्राप्त करने के बाद अब अपने बच्चों के साथ रह रहे हैं।बचपन से ही दोस्तों और सहकर्मियों के साथ छोटी घटनाओं को रोचक तरीके से कहना, ड्रामों में हिस्सा लेना, अपने बच्चों को रोज एक नई कहानी सुनाना इत्यादि इनके शौक का हिस्सा थीं। आज की तनाव पूर्ण जीवन शैली में तत्कालीन हास्यास्पद किस्सों की बातें आपको भी गुदगुदा जाएंगी। भाषा शैली के साथ साथ इनकी कहानियों में आपको तत्कालीन संस्कारों और खान पान की भी झलक मिलेगी, जिनके समावेश से इनकी कहानियां प्रेरणादायक होने के साथ साथ चटपटी भी बन पड़ी हैं। कहानियों के इस संकलन के माध्यम से इन्होंने पाठकों के लिए मनोरंजक और ज्ञानवर्धक साहित्य सृजन किया है। ये "सौमित्री उपनाम से कहानियां लिखते हैं। इन कहानियों में इन्होंने अपने दोस्तों के साथ बिताए गए बचपन के कुछ यादगार पलों को काल्पनिकता का प्रयोग करते हुए कहानियों का रूप दिया है। कहानियों में कुछ त्रुटियां हो सकती हैं जिनके लिए लेखक क्षमा प्रार्थी है।
Thirteen Hindi stories in which children's sharp perception quietly outmanoeuvres the adult world around them.
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